पर्यटन स्‍थल माथेरान की मनोरम वादियों में पहुंचे sanjay bhusahn patiyala

0
37
sanjay bhusahn patiyala

भोजपुरी, हिंदी, पंजाबी, गुजराती आदि फिल्‍मों के पीआरओ संजय भूषण पटियाला गणतंत्र दिवस के अवसर पर पर्यटन स्‍थल माथेरान पहुंचे। इस दौरान सैर पर उनके साथ अनिल चौरसिया और डॉ अमित यादव भी थे, जिन्‍होंने इस पर्यटन स्‍थल का जमकर लुत्‍फ उठाया। आपको बता दें कि माथेरान पश्चिम भारत में महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक सुन्दर पर्वतीय पर्यटन स्थल है। लगभग 2650 फुट की ऊँचाई पर बसा माथेरान पर्यटन स्थल पश्चिमी घाट श्रंखला के पहाड़ी क्षेत्र में बसा है।

माथेरान को लेकर संजय भूषण पटियाला ने बताया कि माथेरान का अर्थ है- “सिर पर जंगल”। इतिहास से यह जानकारी मिलती है कि ‘ह्यू पोलिंट्ज़ मलेट’ नाम के व्यक्ति ने वर्ष 1850 में माथेरान की खोज की थी। पंचगनी के साथ ही अंग्रेज़ों ने इस स्थान को भी गर्मियों के एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया था। अन्य पर्यटन स्थलों की तरह माथेरान में भी अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जो मंत्रमुग्ध करने वाला है। इनमें पेनोरमा पॉइंट खास है, जो संपूर्ण क्षेत्र का 360 डिग्री का दृश्य प्रस्तुत करता है। इस स्थान से देखे जा सकने वाले सूर्योदय और सूर्यास्त को देखकर पर्यटक मुग्ध हो जाते हैं।

उन्‍होंने बताया कि हार्ट पॉइंट, मुंबई के रात्रि जीवन से आने वाले विभिन्न रंगों के प्रकाश का एक मोहक दृश्य हार्ट पॉइंट प्रस्तुत करता है। तो लुइस पॉइंट से एक ऐतिहासिक क़िले को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो माथेरान का एक अन्य प्रसिद्ध स्थल है। वर्तमान में यह क़िला अब खंडहर बन चुका है। इसके अलावा माथेरान के कुछ अन्य प्रसिद्ध पॉइंट ‘मंकी पॉइंट’, ‘प्रौक्युपाइन पॉइंट’ और ‘वन ट्री हिल पॉइंट’ हैं। माथेरान पुरानी ब्रिटिश वास्तुकला से प्रेरित इमारतों और स्मारकों से भरा हुआ है।

संजय ने बताया कि माथेरान के विषय में एक रोचक तथ्य यह है कि यह विश्व के उन कुछ क्षेत्रों में से एक है, जहाँ किसी भी प्रकार के वाहन की अनुमति नहीं है। यह पारिस्थितिकी से प्रभावित है और यहाँ आने वालों को उस समय की झलक दिखाता है, जब आस-पास वाहन नहीं थे। यहां आने के एक ही साधन है – घुड़सवारी। इसके अलावा माथेरान गर्मियों में भी चिलचिलाती धूप से लगभग बचा रहता है। यहाँ साल भर मौसम ठंडा रहता है, जहाँ रातें आश्चर्यजनक रूप से ठंडी होती हैं। यहाँ अक्सर आने वाले लोग मोहक प्राकृतिक दृश्यों के कारण यहाँ आने की शपथ लेते हैं, जो मानसून में उन्हें आकषित करते हैं।