कैसे पहुँचें माथेरान घूमने आइये जानते है

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माथेरान पश्चिम भारत में महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक सुन्दर पर्वतीय पर्यटन स्थल है। लगभग 2650 फुट की ऊँचाई पर बसा माथेरान पर्यटन स्थल पश्चिमी घाट श्रंखला के पहाड़ी क्षेत्र में बसा है। बड़े व्यस्त शहरों से माथेरान की निकटता इसे सप्ताहांत पर शीघ्र आश्रय स्थल बनाती है। माथेरान का अर्थ है- “सिर पर जंगल”। इतिहास से यह जानकारी मिलती है कि ‘ह्यू पोलिंट्ज़ मलेट’ नाम के व्यक्ति ने वर्ष 1850 में माथेरान की खोज की थी। पंचगनी के साथ ही अंग्रेज़ों ने इस स्थान को भी गर्मियों के एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया था।


पर्यटन स्थल
माथेरान समुद्र तल से लगभग 800 मीटर की ऊँचाई पर है। अन्य पर्यटन स्थलों की तरह माथेरान में भी अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जो पास के क्षितिज के मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्य प्रस्तुत करते हैं-

पेनोरमा पॉइंट – यह एक ऐसा पॉइंट है, जो संपूर्ण क्षेत्र का 360 डिग्री का दृश्य प्रस्तुत करता है। इस स्थान से देखे जा सकने वाले सूर्योदय और सूर्यास्त को देखकर पर्यटक मुग्ध हो जाते हैं।
हार्ट पॉइंट – मुंबई के रात्रि जीवन से आने वाले विभिन्न रंगों के प्रकाश का एक मोहक दृश्य हार्ट पॉइंट प्रस्तुत करता है।
लुइस पॉइंट – इस पॉइंट से एक ऐतिहासिक क़िले को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो माथेरान का एक अन्य प्रसिद्ध स्थल है। वर्तमान में यह क़िला अब खंडहर बन चुका है, परंतु अपने जमाने की यह एक बेजोड़ और मज़बूत राजसी संरचना थी।


अन्य आकर्षण
माथेरान के कुछ अन्य प्रसिद्ध पॉइंट ‘मंकी पॉइंट’, ‘प्रौक्युपाइन पॉइंट’ और ‘वन ट्री हिल पॉइंट’ हैं। माथेरान पुरानी ब्रिटिश वास्तुकला से प्रेरित इमारतों और स्मारकों से भरा हुआ है। इनमे से अधिकांश संरचनाएँ ‘विश्व विरासत स्थल’ घोषित कर दी गई हैं। चारलोट नाम की झील आराम करने के लिए सबसे उत्तम स्थान है।

यहाँ यात्री विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देख सकते हैं। यहाँ किनारे पर चलते हुए शांत वातावरण का आनन्द लिया जा सकता है या उद्यान में बच्चों के साथ समय व्यतीत किया जा सकता है। इस स्थान पर रहते हुए पिसारनाथ के ग्रामीण मंदिर को अवश्य देखना चाहिए। ‘मोरबे बाँध’ पानी से संबंधित एक अन्य स्थान है। माथेरान के वन घने हैं और कुछ भागों में अभेद्य हैं। इस संपूर्ण क्षेत्र के चारों ओर बंदरों को मुक्त रूप से घुमते हुए देखकर पर्यटक आश्चर्यचकित हो जाते हैं। सामान्यतः यह सलाह दी जाती है कि पर्यटक अपने साथ कोई भी प्लास्टिक की वस्तु न ले जाएँ, क्योंकि बंदर यह छीन सकते हैं।
वाहन वर्जित क्षेत्र


माथेरान के विषय में एक रोचक तथ्य यह है कि यह विश्व के उन कुछ क्षेत्रों में से एक है, जहाँ किसी भी प्रकार के वाहन की अनुमति नहीं है। यह पारिस्थितिकी से प्रभावित है और यहाँ आने वालों को उस समय की झलक दिखाता है, जब आस-पास वाहन नहीं थे। वाहन न होने के कारण यहाँ प्रदूषण और वाहनों के हॉर्न आदि की आवाज़ बहुत कम है, जिसके परिणामस्वरूप इस छोटे से पर्वतीय स्थल ने प्रतिदिन आने वाले हजारों पर्यटकों के बाद भी आकर्षक शान्ति को बरकरार रखा है। यही कारण है कोई भी पर्यटक यहाँ घुड़सवारी की गतिविधि से बच नहीं सकता। यहाँ हाथ से चलाई जाने वाली गाडियाँ भी हैं। यहाँ केवल एम्बुलेंस ही जा सकती है।

रचनात्मक कलाकृति
यहाँ के आस-पास के बाज़ार में ग्राहक अक्सर उत्तेजित हो जाते हैं, क्योंकि पर्यटकों के लिए यहाँ अनेक वस्तुएँ, रचनात्मक कलाकृति से स्मृति चिह्न तक रखी होती हैं, जिन्हें ख़रीदकर घर ले जाया जा सकता है। माथेरान गर्मियों में भी चिलचिलाती धूप से लगभग बचा रहता है। यहाँ साल भर मौसम ठंडा रहता है, जहाँ रातें आश्चर्यजनक रूप से ठंडी होती हैं। यहाँ अक्सर आने वाले लोग मोहक प्राकृतिक दृश्यों के कारण यहाँ आने की शपथ लेते हैं, जो मानसून में उन्हें आकषित करते हैं।

कैसे पहुँचें
भारत के सभी प्रमुख शहरों और महानगरों से माथेरान तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। चाहे यात्रा वायुमार्ग, सड़कमार्ग या फिर रेलमार्ग से की जाए। रेलमार्ग द्वारा माथेरान निकट से जुड़ा हुआ है। रेल से माथेरान तक की रेलयात्रा साँस रोक देने वाली होती है। यदि पर्यटक हवाईमार्ग द्वारा पहुँचने की योजना बना रहे हैं तो पुणे निकटतम हवाई अड्डा है, जहाँ से किसी वाहन द्वारा घाट से होते हुए जाना पड़ेगा। यहाँ पहुँचने का सबसे उत्तम विकल्प स्वयं का वाहन है। लेकिन ऐसे में सावधान रहना चाहिए, क्योंकि यहाँ के कुछ मार्ग कुशल चालकों के लिए भी कठिन सिद्ध होते हैं।