खेसारी के गुरु कमलाकांत व्यास ने गायन और झाल बजाना सिखिया

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Bhojpuri Actor Khesari Lal Yadav Birthday: भोजपुरी स‍िनेमा के सुपरस्‍टार खेसारी लाल यादव आज (15 मार्च) जन्‍मद‍िन मना रहे हैं। जान‍िए उनके हीरो बनने की पूरी कहानी।


Khesari Lal Yadav Birthday, life story: ‘कैसे आकाश में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो’, दुष्यंत कुमार की ये लाइन कई लोगों की लाइफ लाइन है ये बात जगजाहिर है। भोजपुरी सिनेमा का एक चमकीला तारा जो अपने देसीपन और ठेठ भोजपुरी के लिए लोकप्रिय है, नाम है खेसारी लाल यादव, आज ऊनका जन्मदिन है। 15 मार्च के दिन जन्मे खेसारी बड़ी मुश्किलों में पैदा हुए। उनका घर कच्चा था जो बारिश की वजह से ढह गया था, इसलिए उनकी मां ने उन्हें पडोसी के पक्के मकान में जन्म दिया। खेसारी तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके संयुक्त परिवार में चाचा-चाची और उनके चार लड़के और उनके मां-बाप और तीन भाई हैं। खेसारी का बचपन बहुत कठिनाई में गुजरा। पढ़ने के दौर में उनके हाथ में भैंस का पगहा आ गया। उनके पिता दिल्ली के ओखला के संजय कॉलोनी फेज 2 में एक झुग्गी में रहा करते थे और चना बेचते थे। खेसारी जब बड़े हुए तो उन्होंने भी करीब 2 साल तक अपने पिता के साथ वहीं लिट्टी-चोखा बेचा और उन्ही पैसों से गानों के कैसेट्स निकाले।

खेसारी शुरू से ही गाने बजाने में ध्यान लगाने लगे थे। उनके गांव रसूलपुर में ही महाभारत और रामायण की कथा गाकर सुनाने वाले उनके गुरु कमलाकांत मिश्र व्यास ने खेसारी को झाल बजाने का काम सौंप दिया। खेसारी झाल बजाने के साथ कोरस गाते गाते आगे गाने गाने लगे। यहां से उनकी गायकी की शुरुआत हुई। खेसारी का असली नाम शत्रुघ्न कुमार यादव है। खेसारी उनका नाम पड़ने के पीछे वजह उनका खूब बोलना और उनकी हाज‍िरजवाबी है। खेसारी एक दलहन का नाम है जो खाने के प्रयोग में कम ही लाया जाता है। अगर खेसारी का एक दाना भी खेत में और दाल के बीज के साथ गिर जाये तो वह पूरे खेत में पसर जाता है और दूसरी फसलों से ज्‍यादा उग जाता है। खेसारी का नाम जब बचपन में लोगों ने रखा होगा तो उन्हें भी इस बात का भान नहीं होगा कि एक दिन खेसारी सच में अपने नाम के अनुकूल साबित होंगे। जब उनका कोई गाना डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलीज होता है तो दूसरों के गानों की ट्रैफिक भी खेसारी को सुनने आ जाती है।

खेसारी का लौंडा नाच दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय है। खेसारी ने पारंपरिक गायकी तो नहीं सीखी लेकिन उनका खांटीपन दर्शकों को खूब लुभाता है। वह अपने फिल्मों में अपनी देसी संवाद अदायगी के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रशंसक उन्हें गोविंदा का भोजपुरी अवतार मानते हैं। संयोगवश, उनकी पहली फिल्म का नाम भी गोविंदा की सुपरहिट फिल्म साजन चले ससुराल पर था। इस फिल्म ने भी सिनेमाघरों में सिल्वर जुबली मनाया और उसके बाद की लगातार 7 फिल्मों ने भी कुछ ऐसा ही करनामा कर दिखाया। यही वजह थी कि खेसारी जो सीडी कैसेट के किंग हुआ करते थे वह सिनेमा दर्शकों के भी दिल के राजा हो गए।