भिखारी ठाकुर की परंपरा को आगे बढ़ा रहे 92 वर्षीय रामचंद्र मांझी

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भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की नाट्य यात्रा के सहजीवी रामचंद्र मांझी 92 साल की उम्र में भी मंच पर जमकर थिरकते और अभिनय करते हैं। भिखारी ठाकुर की परंपरा को आगे बढ़ाने वालों का सहयोग भी कर रहे हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कंवेंशन सेंटर में भिखारी ठाकुर के नाच के शताब्दी वर्ष में भिखारी ठाकुर रंगमंडल के तहत उन्होंने प्रस्तुति दी। मांझी कहते हैं, ‘मैं दस साल की उम्र में भिखारी ठाकुर से जुड़ा था। मैंने वह दौर देखा जब सिनेमा की पहुंच आम लोगों तक नहीं थी, भिखारी ठाकुर की मंडली का नाच देखने लोग दूर-दूर से आते थे। मैं नारी की भूमिका निभाता था। बिदेसिया में वेश्या का अभिनय करता था।’ रामचंद्र मांझी को आज के दौर से शिकायत है। वह बताते हैं कि मालिक (भिखारी ठाकुर) कहते थे कि कलाकार सबका है, इसलिए सबको ध्यान में रखकर प्रस्तुति देनी चाहिए। शरीर से कपड़े उतारने पर परिवार के साथ बैठे लोग असहज हो जाते हैं। बड़े-बड़े साहब लोगों ने हमारा नाच देखा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तो तीन बार देखे थे। कई लोग मालिक की मंडली छोड़कर चले गए, लेकिन मैंने उनका साथ नहीं छोड़ा।

रामचंद्र मांझी के मित्र जैनेंद्र स्कूल ऑफ आ‌र्ट्स एंड एस्थेटिक्स में शोधार्थी हैं। जैनेंद्र बताते हैं कि शोध के दौरान मैंने बिहार के छपरा में भिखारी ठाकुर की नाच मंडली के लोगों को जोड़कर एक समूह तैयार किया। मेरा शोध कार्य लौंडा नाच और भिखारी ठाकुर पर है। मैं नाच के दौरान भिखारी ठाकुर के गोपी जंतर (विशेष प्रकार का वाद्ययंत्र, जिसे भिखारी ठाकुर बजाते थे) को बजाता हूं। वहां एक प्रशिक्षण केंद्र भी चलता है। हमारी कोशिश है कि भिखारी ठाकुर की परंपरा को पुनर्जीवित किया जाए। वह कहते हैं कि बिदेसिया भिखारी ठाकुर की अपनी कहानी थी, जो मंच पर आई और बहुत प्रसिद्ध हुई। वह दूरदर्शी थे। बिहार में शराब बंदी अब लागू हुई है, लेकिन वह शराब को लेकर एक नाच पिया नसइल कर चुके थे। जातिगत भेदभाव को लेकर उनकी कृति नाई बहार है, जिसमें गांव के एक नाई की तकलीफ दिखती है। इस समूह को आगे बढ़ाने के लिए संगीत नाटक अकादमी काफी मदद दे रही है।

हेलेन और सुरैया के साथ भी कर चुके हैं नृत्यजैनेंद्र बताते हैं कि रामचंद्र मांझी ने हेलेन और सुरैया के साथ भी प्रस्तुति दी थी। वह विभिन्न जगहों पर भिखारी ठाकुर के साथ जाते थे। जैनेंद्र की पत्नी सरिता साज ने प्रयाग संगीत समिति से शास्त्रीय गायन की शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन वह भिखारी ठाकुर के नाटकों के लिए रामचंद्र मांझी के निर्देशन में लोक गीत गाती हैं। वह कहती हैं कि ‘पिया गइले परदेसवा ए सजनी’ इस गीत को बदल कर लोग इसकी मूल आत्मा को मार रहे हैं।

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